आशीर्वचन
जो फल तीर्थयात्रा से, जो पुण्य ब्राह्मण भोजन से,
जो पुण्य व्रत उपवास और तपस्या से, जो पुण्य दान करने
और भगवान का कीर्तन करने से, जो पुण्य सभी प्रकार के यज्ञों से
प्राप्त होता है वह फल मात्र गौ को तृण खिलाने से प्राप्त हो जाता है.
हमारी भारतीय संस्कृति गौ माता पर ही आधारित है. हमारा मूल अधिष्ठान, हिंदू होने का लक्षण गौ की पूजा है. गाय की सेवा करने वाला ही हिंदू होता है यह कहा गया है. गौ माता में सारे देवी – देवता विद्यमान हैं. अकेले गौ माता की पूजा कर लेने से समस्त ३३ कोटि देवी – देवताओं की पूजा अपने आप हो जाती है. धर्म पालन के लिए हम क्या कर सकते हैं ? तो सबसे पहले यह उपदेश प्राप्त होता है ऋग्वेद में कि गौ माता की पूजा करनी चाहिए. आप सब बहुत भाग्यशाली हैं, मनुष्य हो जाना ही दुर्लभ है, कठिन है, बहुत बड़ी घटना है और मनुष्य होकर के गौ माता की सेवा की भावना मन में पैदा हो जाना यह आपके लिए बहुत बड़े सौभाग्य का यह अवसर है.
गौ माता की सेवा से आप समस्त सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं. शास्त्रों में तो यह आदेश है कि कुछ भी प्राप्त ना हो तब भी गौ माता की सेवा करनी चाहिए. जैसे हम अपने वृद्ध माता – पिता की सेवा करते हैं, परमात्मा की सेवा करते हैं उसके पहले गौ माता की सेवा करना है.
उमा कल्याण ट्रस्ट मुंबई द्वारा गौ माता की सेवा के लिए अनेक प्रकल्पों का उद्घाटन हुआ है. कई वर्षों से उमा कल्याण ट्रस्ट गौ माता की सेवा में संलग्न है. वृंदावन में, मुंबई में बहुत अच्छा अभियान आप लोगों ने प्रारंभ किया है कि गौ माता को किसानों तक भेजना और किसानों के ह्रदय में यह गौ सेवा की निष्ठा जागृत करना, गौ माता की उपयोगिता बताना, धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक. उमा कल्याण ट्रस्ट के सभी ट्रस्टियों को कार्यकर्ताओं को उनके अधिकारियों को जितने भी लोग इनके सेवा के प्रकल्प में संबंध रखते हैं, सभी को हम भगवान द्वारकाधीश का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
- द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य श्रीस्वामी सदानन्द सरस्वती जी