Home Blog Page 11

दंत मंजन

0

गाय के गोबर में कई प्रकार की जड़ी बूटियों को मिलकर दंत मंजन बनाया जाता है. ये दन्त मंजन मुख शुद्धि के साथ -साथ पायरिया आदि मुख रोगों के उपचार के लिए भी उपयोगी है. 

गोमूत्र फिनायल

0

गौमूत्र एक असरदार कीटाणुनाशक माना जाता है. साफ़-सफाई के लिए गौमूत्र से बना फिनायल अन्य कैमिकल युक्त फिनायलों से काफी अधिक प्रभावशाली होता है. इस फिनायल को बनाने में कम लागत आती है. इसलिए यह फिनायल सस्ता भी होता है. 

गौमूत्र से फिनाइल बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है. बहुत ही कम समय में बेहतर फिनाइल बनाया जा सकता है. गोमूत्र में पाइन ऑयल, पानी, सिट्रोनेला और कृत्रिम सुगंधित पदार्थ मिलाकर फिनायल बनाया जाता है. किसी विशिष्ट रंग का फिनाइल बनाना चाहते हैं, तो इसमें अपने पसंद के मुताबिक़ रंग डालकर रंगीन फिनाइल भी बना सकते हैं. 

गोमूत्र में नीम के तेल आदि प्राकृतिक चीजों का उपयोग करके हर्बल फिनाइल बनाया जाता है. इसमें किसी भी तरह के रासायनिक तत्वों का इस्तेमाल नहीं होता है, इसलिए ये फिनाइल किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. इसका उपयोग करने से बैक्टीरिया भी आसानी से मर जाते हैं.

गोबर से बने गमले

0

मिट्टी और सीमेंट की तरह गाय के गोबर से भी गमले और फ्लावर पॉट बनाये जा रहे हैं. गाय के गोबर से बने गमलों की ये विशेषता है कि इसमें मिट्टी भरकर पौधे लगाने से पौधों को किसी प्रकार की हानि नहीं होती है, बल्कि इससे पौधों की तेजी से वृद्धि भी होती है. गाय के गोबर को सुखाने के बाद उसके बुरादे में लकड़ी का बुरादा और फ़ेवीकोल मिलाकर गमले और फ्लावर पॉट बनाए जा सकते हैं. 

गोबर से बनी राखी

0

रक्षाबंधन के त्यौहार पर गाय के गोबर से राखियां बनाई जा रही हैं. ये राखियाँ बड़े आराम से घर में बनाई जा सकती हैं. इसे बनाने के लिए पहले गोबर के छोटे-छोटे विभिन्न आकर में बेस तैयार कर लिए जाते हैं. सूखने के बाद इन्हें रंग लिया जाता है. मांग के मुताबिक़ इसे स्टोन, मोती आदि से सजाकर मौली धागे में चिपका दिया जाता है. इस तरह से कम समय में ही राखी बनकर तैयार हो जाती है. कलाई पर बंधने से ये रेडिएशन भी दूर करने में सहायक है. 

गोबर की मूर्तियां

0

गाय के गोबर को पवित्र माना जाता है. पूजा-पाठ कई प्रकार से गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गाय के गोबर में लक्ष्मीजी का निवास है. गाय के गोबर से ही लक्ष्मीजी का स्वरुप ‘गौरजा’ बनाकर पूजन किया जाता है. गाय के गोबर से लक्ष्मीजी सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं. सबसे पहले गोबर को सुखाकर उसका बुरादा तैयार कर लिया जाता है. इसके बाद बाजार में मिलने वाले मूर्तियों के सांचे में लकड़ी का बुरादा, और फ़ेवीकोल के साथ सूखे गोबर के बुरादे को मिलाकार भर दिया जाता है. चार-पांच दिन बाद मूर्ति तैयार हो जाएगी. 

गोबर से बनी मच्छर मार अगरबत्ती

0

मच्छरों को मारने के लिए मच्छरमार अगरबत्ती या फिर कॉइल का इस्तेमाल किया जाता है. जो कई तरह के रसायनों से बनाये जाते हैं, इसलिए मानव शरीर के लिए ये बहुत ही हानिकारक है.

मच्छरों को मारने के लिए गोबर से बनी अगरबत्ती रसायन रहित होती है. इसके जलने की गंध के कारण मच्छर एवं कीड़े – मकोड़े या तो मरते हैं या तो भाग जाते हैं. 

गोबर से बना प्लास्टर

0

गाय के गोबर से एक ऐसा प्लास्टर बनाया जा रहा  है, जिसका उपयोग करने से गांव के कच्चे घरों जैसा सुकून मिलता है. साफ़-सफाई और बीमारियों पर नियंत्रण के लिए पहले की तरह अब घरों में गोबर की लिपाई नहीं होती. ये काम अब गाय के गोबर से बना प्लास्टर कर रहा है. गाय के गोबर में प्रोटीन होता है, जो घर की हवा को शुद्ध रखने का काम करता है. 

गाय के गोबर से बना प्लास्टर अग्निरोधक और उष्मा रोधी होता है. इससे सस्ते और इको फ्रेंडली मकान बनाये जाते हैं.

गोबर माला

0

गाय के गोबर से कई प्रकार की माला बनाई जाती है. बताया जाता है कि ‘गोबर माला’ गले में रहने से स्नानु संबंधी रोगों में आराम मिलता है. 

गोबर की आकर्षण चूड़ियां

0

गाय के गोबर से आकर्षण चूड़ियां बनाई जातीं हैं। इन चूड़ियों का रोगोपचार में महत्व बताया गया है. 

गाय के गोबर से लकड़ी

0

गाय के गोबर से हवन की लकड़ी बनाई जाती हैं, जिसका उपयोग पूजा पाठ के दौरान हवन में आग प्रज्ज्वलित करने  के लिए किया जाता है. इसके अलावा अन्य अलग-अलग कामों में भी गाय के गोबर से बनी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. गोबर से बनी लकड़ी काफी समय तक जलती रहती हैं,  इसलिए आग जलाने के लिये इसका उपयोग किया जाता है। गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन भी आती हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के डाई लगे रहते हैं, जो गोबर को लकड़ी का आकार प्रदान करते हैं. इसके बाद इसे अच्छी तरह से सुखा लिया जाता है.